Tuesday, March 30, 2010

लाइलाज नहीं माइग्रेन...



सिर जो तेरा चकराए...जी हां आजकल यह आम समस्या बन गयी है। बिजी लाइफ स्टाइल की वजह से आजकल के युवा कम उम्र में ही तमाम बीमारियों के शिकार होने लगे हैं। माइग्रेन भी इन्हीं मे से एक है, सिरदर्द का एक गंभीर रूप जो बार-बार या लगातार होता है, उसे माइग्रेन कहते हैं। माइग्रेन को आम बोलचाल की भाषा में अधकपारी भी कहते हैं। यह नाम इसे इसलिए मिला क्योंकि आम तौर पर इसका शिकार होने पर सिर के आधे हिस्से में दर्द रहता है, जबकि आधा दर्द से मुक्त होता है। वैसे फ्रेंच शब्द माइग्रेन का अर्थ भी यही है। जिस हिस्से में दर्द होता है, उसकी भयावह चुभन भरी पीडा से आदमी ऐसा त्रस्त होता है कि सिर क्या बाकी शरीर का होना भी भूल जाता है। यह कोई छोटा-मोटा दर्द नहीं है। यह आपके सारे दिन की गतिविधियों को ठप्प कर देने वाला दर्द है। माइग्रेन मूल रूप से तो न्यूरोलॉजिकल समस्या है। इसमें रह-रह कर सिर में एक तरफ बहुत ही चुभन भरा दर्द होता है। यह कुछ घंटों से लेकर तीन दिन तक बना रहता है। इसमें सिरदर्द के साथ-साथ जी मिचलाने, उल्टी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। इसके अलावा फोटोफोबिया यानी प्रकाश से परेशानी और फोनोफोबिया यानी शोर से मुश्किल भी आम बात है। माइग्रेन से परेशान एक तिहाई लोगों को इसकी जद में आने का एहसास पहले से ही हो जाता है।

माइग्रेन की पहचान
• क्या आपको सिर के एक हिस्से में बुरी तरह धुन देने वाले मुक्कों का एहसास होता है, और लगता है कि सिर अभी फट जाएगा?
• क्या उस वक्त आपके लिए अत्यंत साधारण काम करना भी मुश्किल हो जाता है?
• क्या आपको यह एहसास होता है कि आप किसी अंधेरी कोठरी में पड़े हैं, और दर्द कम होने पर ही इस अनुभव से निजात मिलती है?
अगर इनमें से किसी भी प्रश्न का उत्तर हां में है, तो इस बात की पूरी संभावना है कि आपको माइग्रेन हुआ है। इसलिए फौरन डॉक्टर के पास जाकर इसकी पुष्टि कर लेनी चाहिए।
ज्यादातर लोगों को माइग्रेन का पता तब चलता है, जब वे कई साल तक इस तकलीफ को ङोलने के बाद इसके लक्षणों से वाकिफ हो जाते हैं।

माइग्रेन के कारण
माइग्रेन होने के कई कारण हो सकते हैं। काम की थकान, तनाव, समय पर भोजन न करना, धूम्रपान, तेज गंध वाले परफ्यूम से, बहुत ज्यादा या कम नींद लेना इसका कारण हो सकते हैं। इसके अलावा मौसम का बदलाव, हार्मोनल परिवर्तन, सिर पर चोट लगना, आंखों पर स्ट्रेस पड़ना या तेज रोशनी, एक्सरसाइज न करने से भी माइग्रेन की परेशानी उत्पन्न हो सकती है। कई लोगों को तेज धूप, गर्मी या ठंड से भी परेशानी होती है। जिन लोगों को हाई या लो ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और तनाव जैसी समस्याएं होती हैं उनके माइग्रेन से ग्रस्त होने की आशंका बढ जाती है। कई बार तो केवल इन्हीं कारणों से माइग्रेन हो जाता है।
यही नहीं, अगर आपको किसी ऐसे व्यक्ति से बार-बार मिलना पडे जिसे आप न पसंद करते हों, तो यह भी सिरदर्द का कारण हो सकता है। ऐसा काम भी माइग्रेन का कारण हो सकता है जिसे आप पसंद न करते हों। ज्यादातर लोगों के माइग्रेन से ग्रस्त होने के कारण भावनात्मक होते हैं। भावनाओं को दबाने से भी माइग्रेन हो सकता है। इसलिए भावनाओं को दबाने के बजाय अपने विश्वस्त लोगों से उनकी साझेदारी करें।
बदलती लाइफ स्टाइल के चलते बच्चे भी माइग्रेन का शिकार हो जाते हैं। पढ़ाई का तनाव इसे और बढ़ा देता है। किशोरावस्था से पहले लड़के और लड़कियां दोनों में इसकी संभावना एक समान रहती है। लेकिन बाद में महिलाओं में पुरुषों की अपेक्षा खतरा ज्यादा बढ़ जाता है और माना जाता है कि 15 फीसदी महिलाओं और छह फीसदी पुरुषों को माइग्रेन होता है। इनमें से 60 फीसदी को आधे सिर में और 40 फीसदी को पूरे सिर में माइग्रेन का दर्द होता है।

सिर दर्द का मतलब हमेशा माइग्रेन नहीं होता। लेकिन अगर आपको बहुत तेज दर्द हो रहा है और ऐसा दर्द पहले कभी न हुआ हो, हाथ पैरों में दर्द और कमजोरी महसूस हो रही हो तो तुरंत चिकित्सक की सलाह पर जांच कराएं और समय पर इलाज लें।

माइग्रेन का इलाज
विशेषज्ञों के अनुसार माइग्रेन से निपटने में इस बात का रोल काफी अहम होता है कि आप इसके लिए कितने तैयार हैं। सभी मरीजों में माइग्रेन के पूर्व संकेत (ट्रिगर्स) एक से नहीं होते, इसलिए उनके लिए डायरी में अपनी अनुभूतियां दर्ज करना उपयोगी हो सकता है। इसके बाद आप दवा की सहायता से इन ट्रिगर्स से समय रहते बचकर, माइग्रेन को टाल भी सकते हैं।

संतुलित आहार लें
माइग्रेन में चिकित्सीय इलाज के अलावा संतुलित आहार बहुत जरूरी है। अगर शारीरिक कारणों से माइग्रेन हो तो पहले तो यह समझना चाहिए कि किन तत्वों की कमी या अधिकता के कारण ऐसा हो रहा है। उसके ही अनुसार अपने आहार को संतुलित कर लेना चाहिए। अगर किसी को खाद्य पदार्थो से एलर्जी के कारण माइग्रेन हो तो उसे उन फलों-सब्जियों और अनाज से बचना चाहिए, जिनसे एलर्जी हो सकती है। ऐसा पौष्टिक आहार लें जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाई जा सके। रोज योगाभ्यास करें और विचारों को रचनात्मक बनाए रखें। इसके लिए किसी-किसी दिन उपवास करें। उपवास के दौरान पानी में नीबू का रस मिलाकर छह-सात बार लें। इससे जो ऊर्जा भोजन को पचाने में खर्च होती है, वह बचेगी और उसका उपयोग शरीर अपेक्षाकृत दूसरे महत्वपूर्ण कार्यो पर करेगा। रक्त और लसिका ग्रंथियों को भी थोडा आराम मिलता है। आहार इस तरह तय करें कि पाचन-प्रणाली पर कम से कम बोझ पडे।

चेतावनी : कई बार सिरदर्द दूसरी खतरनाक और जानलेवा बीमारियों का भी संकेत होता है। इसलिए बार-बार होने वाले तेज सिरदर्द, गर्दन दर्द, अकड़न, जी मिचलाने या आंखों के आगे अंधेरा छा जाने को बिलकुल भी नजर अंदाज न करें और फौरन डॉक्टर को दिखाएं।

होम्योपैथिक चिकित्सा
कई बार माइग्रेन के रोगी दवाइयां लेना शुरू तो करते हैं पर थोड़ा आराम मिलते ही बंद कर देते हैं। इससे फिर से तकलीफ बढ़ने का खतरा बना रहता है। माइग्रेन के रोगियों को तब तक दवाइयां लेनी चाहिए जब तक पूरा कोर्स न ख़त्म हो जाए। कई लोगों के साथ ऐसा होता है कि दवा लेने पर माइग्रेन कुछ दिनों के लिए दब तो जाता है पर वह दोबारा उभर जाता है। उनके साथ ऐसा बार-बार होता है।
हालांकि माइग्रेन लाइलाज बीमारी नहीं है, लेकिन अगर यह बढ़ जाए तो काफी परेशान कर सकती है। इसलिए जरूरी है कि कुछ बातों का ध्यान रखकर इस बीमारी से छुटकारा पाया जाए।

औषधियाँ:
होम्योपैथिक दवाएँ जो लक्षणागत माइग्रेन में काम करती हैं वे इस प्रकार हैं।
बेलाडोना, जेलसिमियम, लैकेसिस, स्पाइजिलिया, इग्नेसिया, नेट्रम म्यूर, ओनस्मोडियम, लाईकोपोडियम, नेट्रम सल्फ, सिलिसिया, सल्फर एवं एसिड सल्फर।

उपरोक्त दवाये केवल उदहारण के तौर पर दी गयी है।कृपया किसी भी दवा का सेवन बिना परामर्श के ना करे, क्योकि होम्योपैथी में सभी व्यक्तियों की शारीरिक और मानसिक लक्षण के आधार पर अलग -अलग दवा होती है !

5 comments:

Hashmi Dawakhana said...

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John Peter said...

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John Peter said...

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John Peter said...

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Matt Hammel said...

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